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Thursday, 28 January 2016

वातावरण

पवित्र दीपक




हेलो प्रिया दोस्तों,


  • हिंदू धर्म के अनुसार हम जब भी पूजा करते हैं तो दीपक जरूर जलाते हैं, क्योंकि दीपक ज्ञान और रोशनी का प्रतीक है। पूजा में दीपक का विशेष महत्व है। आमतौर पर विषम संख्या में दीप प्रज्जवलित करने की परंपरा चली आ रही है। दरअसल, दीपक जलाने का कारण यह है कि हम अज्ञान का अंधकार मिटाकर अपने जीवन में ज्ञान के प्रकाश के लिए पुरुषार्थ करें। इसलिए दीपक एक, तीन, पांच और सात की विषम संख्या में ही जलाए जाते हैं ऐसा मानना है। विषम संख्या में दीपों से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता है। दीपक में गाय के दूध से बना घी उपयोग हो तो अच्छा या अन्य घी या तेल का यूज भी किया जा सकता है।
  • गाय के घी में रोगाणुओं को भगाने की क्षमता होती है। यह घी जब दीपक में अग्नि के संपर्क से वातावरण को पवित्र बना देता है। प्रदूषण दूर होता है। दीपक जलाने से पूरे घर को फायदा मिलता है। चाहे वह पूजा में सम्मिलित हो या नहीं। दीप प्रज्जवलन घर को प्रदूषण मुक्त बनाने का एक क्रम है। दीपक में अग्नि का निवास होता है। जो पृथ्वी पर सूरज का रूप है।



कब्ज के कारण

कब्ज के कारण गैस व इस परेशानी की वजह से पेट फूलना आजकल एक कॉमन समस्या है। पेट फूलना एक संकेत हो सकता है कि खाया गया भोजन ठीक तरह से हजम नहीं हुआ है, क्योंकि ऐसा होने पर छोटी आंत के अंदर गैस भर जाती है। पेट फूलने की समस्या अक्सर उन महिलाओं में भी देखी जा सकती है, जिनके पीरियड्स शुरू होने वाले हों। आइए जानते हैं कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों को जिनसे गैस की समस्या में तुरंत राहत मिलती है।
1. सौंफ
एक चम्मच सौंफ खाने या इसकी चाय पीने से पेट की गैस एक मिनट में निकल जाती है।
2. अदरक
आधा चम्मच सूखा अदरक पाउडर लें और उसमें एक चुटकी हींग व सेंधा नमक मिलाकर एक कप गर्म पानी में डालकर पिएं। राहत मिलेगी।
3. पुदीना
एक कप पुदीने की चाय रोजाना पीने से पेट दर्द ठीक होता है और गैस नहीं होती है।
4. कद्दू
रोजाना के भोजन में एक कप कद्दू खाएं। कद्दू में विटामिन ए , पोटैशियम और फाइबर होते हैं जो पाचन में मददगार होते हैं।
5. हरी धनिया
पेट फूलने पर हरे धनिया की चाय पिएं। इससे पेट दर्द ठीक हो जाएगा और गैस भी नहीं होगी।
6. तुलसी 
तुलसी की पत्तियां खा लेने से भी गैस से तुरंत राहत मिलती है।
7. दही
दही में फायदेमंद बैक्टीरिया होते हैं, जिनसे पेट हमेशा ठीक रहता है व खाना भी हजम हो जाता है।
8. अजवायन
खाना खाने के बाद थोड़ी सी अजवायन लेने से पेट नहीं फूलता।
9. नींबू
रोज सुबह एक गिलास गर्म पानी में नींबू निचोड़ कर पीने से पेट नहीं फूलता।


प्रिया मित्रो आपको अजय का यह सुझाओ कैसा लगा। ....... अपना कमेंट देना ना भूलें। 

 धन्यवाद 
अजय पाण्डेय 

Wednesday, 27 January 2016

मधुमेह

मधुमेह के लिए प्रभावी हर्बल उपचार

हेलो दोस्तों ,
आज आपको मधुमेह के बारे में थोड़ा जानकारी देना चाहुगा। ...... 
हरबो डायीबिकन कैप्सूल, मधुमेह का इलाज, मधुमेह दवा, मधुमेह प्राकृतिक दवाई, मधुमेह हर्बल चिकित्सा, मधुमेह कैप्सूल, मधुमेह दवाएँखून में चीनी (बल्ड शुगर) को नियंत्रण न कर पाने के बीमारी को “मधुमेह” कहते हैं। मधुमेह की बीमारी एक खतरनाक रोग है। यह बीमारी में हमारे शरीर में अग्नाशय द्वारा इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण होती है।रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है, साथ ही इन मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अवयव भी असामान्य हो जाते हैं। धमनियों में बदलाव होते हैं। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है। मधुमेह होने पर शरीर को भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने में कठिनाई होती है। पेट फिर भी भोजन को ग्लूकोज में बदलता रहता है। ग्लूकोज रक्त धारा में जाता है। किन्तु अधिकांश ग्लूकोज कोशिकाओं में नही जा पाते जिसके कारण इस प्रकार हैं:
  • इंसुलिन की मात्रा कम हो सकती है।
  • इंसुलिन की मात्रा अपर्याप्त हो सकती है किन्तु इससे रिसेप्टरों को खोला नहीं जा सकता है।
  • पूरे ग्लूकोज को ग्रहण कर सकने के लिए रिसेप्टरों की संख्या कम हो सकती है।
  • यह रोग, खून के जांच से पता चलता है।
मधुमेह के कारण
  • खून में चीनी (बल्ड शुगर) को सामान्य स्तर में नियंत्रित होना आवश्यक है। इसके लिये शरीर में अनेक अंग और होरमोंस मिलकर काम करते हैं। अगर आपका शरीर यह नियंत्रण के शक्ति खो देता है, तो आपको “डायबिटीज़” हो जाता है।
  • आधिकांश समय (90%) यह गर्भ के शुरुआत में हो सकता है। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि आपको गर्भ के अंत में “डायबिटीज़” नहीं हो सकता है।
  • कुछ लोग को पहले से “डायबिटीज़” होता है, जिसके बारे में वो अवगत नहीं होते हैं। यह जब गर्भ के दौरान बढ़ जाता है, तो जांच के बाद पहचाना जाता है।
  • गर्भ के होरमोंस जैसे कि “प्रोजेस्टेरोन” और “प्लासेंटल लेक्टोजन”, शरीर में उत्तपन “इंसुलिन” के विपरीत काम करते हैं। यह आपको “मधुमेह” का अवस्था दे सकता है।
मधुमेह की संभावना
  • गर्भ के अनेक समस्याओं में से “जेस्टेशनल डायबिटीज़” सबसे ज्यादा लोगों में होता है।
  • “जेस्टेशनल डायबिटीज़” करीब 20 में से 1 मां को हो सकता है।
  • भारतीय लोगों में “जेस्टेशनल डायबिटीज़” अधिक होता है।
  • अगर मां को उपर लिखे हुय कोई भी स्थिती है, तो उसका “जेस्टेशनल डायबिटीज़” होने का रिस्क और बढ़ जाता है।
  • गर्भ के दौरान अगर आपको “डायबिटीज़” हो जाता है, तब उसे “गर्भ में डायबिटीज़” या “जेस्टेशनल डायबिटीज़” कहते हैं। इसके लिये यह जरूरी नहीं है कि आपको उसके लिये इंसुलिन का दवा लेना पड़े या नहीं, या यह रोग गर्भ के बाद रहता है या नहीं।
रक्त शर्करा स्तर
मधुमेह में और सामान्यतया भी रक्त-शर्करा स्तर को सामान्य बनाये रखना आवश्यक होता है। यदि रक्त में शर्करा का स्तर लंबे समय तक सामान्य से अधिक बना रहता है तो उच्च रक्त ग्लूकोज अधिक समय के बाद विषैला हो जाता है। अधिक समय के बाद उच्च ग्लूकोज, रक्त नलिकाओं, गुर्दे, आंखों और स्नायुओं को खराब कर देता है जिससे जटिलताएं पैदा होती है और शरीर के प्रमुख अंगों में स्थायी खराबी आ सकती है। स्नायु की समस्याओं से पैरों अथवा शरीर के अन्य भागों की संवेदना चली जा सकती है। रक्त नलिकाओं की बीमारी से हृदयाघात थो सकता है, पक्षाघात और संचरण की समस्याएं पैदा हो सकती है। आंखों की समस्याओं में आंखों की रक्त नलिकाओं की खराबी (रेटीनोपैथी), आंखों पर दबाव (ग्लूकोमा) और आंखों के लेंस पर बदली छाना (मोतियाबिंद) हो सकते हैं। गुर्दे की बीमारी का कारण, गुर्दा रक्त में से अपशिष्ट पदार्थ की सफाई करना बंद कर देती है। उच्च रक्तचाप से हृदय को रक्त पंप करने में कठिनाई होती है।

हरबो डायीबिकन कैप्सूल स्वाभाविक रूप से खून में शुगर का स्तर मेन्टेन करता है
जिस कारण आप स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन जी सकते है

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मधुमेह का प्रभावी हर्बल इलाज
प्रकृति ने किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए हमें शक्तिशाली दवाई प्रदान की है. जिनको हम घास-फूस समजते हैं दरअसल प्राचीन काल से इन्ही दवाओं के द्वारा इलाज किया जाता रहा है और हमारे पूर्वज इन्ही दवाओं का प्रयोग करते थे तब तक किसी रसायन की खोज नहीं हुई थी और लोग जड़ी-बूटियों के प्रयोग से स्वस्थ रहते थे और दीर्घ आयु होते थे परन्तु रसायन की खोज हो जाने के पश्चात् चिकित्सा के रूप निरन्तर परिवर्तन होते रहे और आज चिकित्सा में रसायन का प्रयोग किया जाता है ये रसायन तुरंत उपचार करने में सक्षम हो सकते है परन्तु यह रसायन हमारे शरीर के अन्य भागो पर बुरा प्रभाव डालते है अतः अब लोग चिकित्सा के पुराने तरीको और दवाओं को मान्यता दे रहें है और भारत भूमि तो इन दवाओं के प्राप्त करने का मुख्य केन्द्र है पुरे विश्व में आज भारत में पाई जाने वाली इस अदभुत दवाओं का प्रयोग विदेशों में भी किया जाने लगा है.

तो ये है वो दवा जो आपको आसानी से हर आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर पे मिल जाएगी। ..... 
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एक बार अपना के जरूर देखें और याद रहे की कभी कभी बड़ी चीज जहा काम नहीं करती वह एक छोटा उपचार ही काम में आ जाता है। ... आप अपना अमूल्य कीमती राय देना न भूलें। .... 

आप मेरे व्हाट्सप्प नंबर पे भी अपना राय दे सकते है। ... 
+९६६५७१८४१२४४ 
अजय पाण्डेय 

मोटापे को कैसे कम करे.....

मोटापे को कैसे कम करे

दोस्तों मनाव का सरीर  बहुत काम ही लोगो को नसीब होता है। .अतः आप लोग इसका ख़याल रखें 
तो आइये हम आप को बताते है कुछ नुख्से। ........... 
मोटापा (अंग्रेज़ी: Obesity) वो स्थिति होती है, जब अत्यधिक शारीरिक वसा शरीर पर इस सीमा तक एकत्रित हो जाती है कि वो स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डालने लगती है। यह आयु संभावना को भी घाटा सकता है। शरीर भार सूचकांक (बी.एम.आई), मानव भार और लंबाई का अनुपात होता है, जब २५ कि.ग्रा./मी.२ और ३० कि.ग्रा/मी२ के बीच हो, तब मोटापा-पूर्व स्थिति; और मोटापा जब ये ३० कि.ग्रा/मी.२ से अधिक हो। मनुष्य को प्रकृति की ओर से संतुलित और सुडौल शरीर मिलता है, पर वह गलत रहन-सहन, बुरी आदत तथा खान-पान में अनियमितता के कारण इस शरीर को बेडौल बना लेता है। वैज्ञानिक रूप से मोटापा हम उसे कहते हैं जिसमें शरीर का वजन ऊँचाई के मान से अधिक होता है।आधुनिक समय में यह एक बीमारी के रूप में तेजी से फैल रहा है।
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इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हम शारीरिक श्रम उतना नहीं करते, जितना कि हमारे द्वारा खाए गए खाने के बाद किया जाना चाहिए। जो ऊर्जा शरीर में ज्यादा उत्पन्ना होकर अतिरिक्त रह जाती है, वह शरीर के उन्हीं भागों में चर्बी के रूप में एकत्र हो जाती है, जिनका उपयोग हम अधिक नहीं करते हैं। कूल्हे व पीठ का भाग बढ़ जाता है, पेट के लटकने से मांसपेशियाँ ढीली हो जाती हैं, हाथों व जाँघों का थुलथुला हो जाना- ये सभी लक्षण मोटापे के रूप में दिखते हैं। मोटे व्यक्ति अधिकांशतः कब्ज के कारण पीड़ित रहते हैं और उन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारी, जोड़ों का दर्द, गठिया, घुटनों में दर्द की संभावना भी अधिक होती है।
पिछले 20 वर्षों के दौरान, वयस्कों के बीच मोटापे की समस्या काफी दुनिया भर में बढ़ी है. नई शोध के अनुसार 80 लाख से अधिक लोग मोटापे से ग्रस्त हैं. यह वृद्धि केवल वयस्कों के लिए ही सीमित नहीं है बल्कि युवा लोग 1980 के बाद से तीन गुना इस समस्या से ग्रस्त है. बच्चों और 6-19 साल के किशोरों में (9 लाख युवा लोगों) का १६ प्रतिशत इस समस्या से ग्रस्त हैं . यदि शीघ्र ही इस समस्या का कुछ समाधान नही किया गया तो सम्पूर्ण विश्व में सबसे अधिक लोग इस समस्या से ग्रस्त होंगे
मोटापा के कारण
मोटापे के कई कारण हो सकते है। इनमें से प्रमुख है:-
  • मोटापा और शरीर का वजन बढ़ना ऊर्जा के सेवन और ऊर्जा के उपयोग के बीच असंतुलन के कारण होता है।
  • अधिक चर्बीयुक्त आहार का सेवन करना भी मोटापा का कारण है।
  • कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन मोटापे का प्रमुख कारण है।
  • असंतुलित व्यवहार औऱ मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापा का कारण बनता है।
  • शारीरिक क्रियाओं के सही ढंग से नहीं होने पर भी शरीर में चर्बी जमा होने लगती है।
  • बाल्यावस्था और युवावस्था के समय का मोटापा व्यस्क होने पर भी रह सकता है।
  • हाइपोथाइरॉयडिज़्म।
विशेष सावधानियाँ
  • तला खाना कम खायें
  • ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जी खायें।
  • रेशायुक्त खाद्य पदार्थ का सेवन अधिक से अधिक करें जैसे अनाज, चना और अंकुरित चना।
  • शरीर के वजन को संतुलित रखने के लिए रोजाना कसरत करें।
  • धीरे, परंतु लगातार वजन को कम करें।
  • ज्यादा उपवास से शारीरिक नुकसान हो सकता है।
  • शारीरिक क्षमता को संतुलित रखने के लिए विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
  • थोड़-थोड़े अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाना खायें।
  • भोजन में चीनी, चर्बीयुक्त खाद्य पदार्थ और अल्कोहल कम लें।
  • कम चर्बी वाले दूध का सेवन करें।

पुरुषों एवं महिलाओं के लिए आदर्श वजन सारणी

पुरुषमहिला
कद(in ft)वज़न
(in kg)
कद
(in ft)
वज़न(in kg)
5′ 2”53.8 – 58.54′ 10”43.5 – 48.5
5′ 3”54.9 – 60.34′ 11”44.5 – 49.9
5′ 4”56.2 – 61.75′ 0”45.8 – 51.3
5′ 5”57.6 – 63.05′ 1”47.2 – 52.6
5′ 6”59.0 – 64.95′ 2”48.5 – 54.9
5′ 7”60.8 – 66.75′ 3”49.9 – 55.3
5′ 8”62.6 – 68.95′ 4”51.3 – 57.2
5′ 9”64.4 – 70.85′ 5”52.6 – 59.0
5′ 10”66.2 – 72.65′ 6”54.4 – 61.2
5′ 11”68.0 – 74.85′ 7”56.2 – 63.0
6′ 0”69.9 – 77.15′ 8”58.1 – 64.9
6′ 1”71.7 – 79.45′ 9”59.9 – 66.7
6′ 2”73.5 – 81.65′ 10”61.7 – 68.5
6′ 3”75.7 – 83.55′ 11”63.5 – 70.3
6′ 4”78.1 – 86.26′ 0”65.3 – 72.1


दोस्तों आपका  एक सुझाओ मेरे पोस्ट में और सुधार ला सकता है। ...... 

धन्यवाद 
अजय पाण्डेय 

गठिया रोग

गठिया का गारेन्टी इलाज


हेलो दोस्तों आज मै अजय लाया हु गठिया रोग की पहचान और उसका इलाज,,,, 
क्या आप गठिया रोग से पीडित हैं?आमवात जिसे गठिया भी कहा जाता है अत्यंत पीडादायक बीमारी है।अपक्व आहार रस याने “आम” वात के साथ संयोग करके गठिया रोग को उत्पन्न करता है।अत: इसे आमवात भी कहा जाता है। इसमें जोडों में दर्द होता है, शरीर मे यूरिक एसीड की मात्रा बढ जाती है। छोटे -बडे जोडों में सूजन का प्रकोप होता रहता है। यूरिक एसीड के कण(क्रिस्टल्स)घुटनों व अन्य जोडों में जमा हो जाते हैं।जोडों में दर्द के मारे रोगी का बुरा हाल रहता है।गठिया के पीछे यूरिक एसीड की जबर्दस्त भूमिका रहती है। इस रोग की सबसे बडी पहचान ये है कि रात को जोडों का दर्द बढता है और सुबह अकडन मेहसूस होती है। यदि शीघ्र ही उपचार कर नियंत्रण नहीं किया गया तो जोडों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
गठिया का उपचार, जोड़ों का दर्द, गठिया, गठिया का प्राकृतिक उपचार, घुटनों में अकड़न, जोड़ों में सूजन, गठिया से राहत,  पैनोजौन कैप्सूल, विरोधी गठिया उत्पादगठिया रोग या संधिवात में रोगी के गांठों में असह्य दर्द होता है। यह रोग पाचन क्रिया से संबंधित है। इसके संबंध खून में मूत्रीय अम्ल का अत्यधिक उच्च मात्रा में पाए जाने से होता है। इसके कारण जोड़ों (प्रायः पादागुष्ठ (ग्रेट टो)) में तथा कभी कभी गुर्दे में भी क्रिस्टल भारी मात्रा में बढ़ता है। गठिया का रोग मसालेदार भोजन और शराब पीने से संबद्ध है। यह रोग पाचन क्रिया से संबंधित है। इसके संबंध खून में मूत्रीय अम्ल का अत्यधिक उच्च मात्रा में पाये जाने से होता है। इसके कारण जोड़ों (प्रायः पादागुष्ठ (ग्रेट टो) में तथा कभी कभी गुर्दे में भी क्रिस्टल भारी मात्रा में बढ़ता है।
यूरिक अम्ल मूत्र की खराबी से उत्पन्न होता है। यह प्रायः गुर्दे से बाहर आता है। जब कभी गुर्दे से मूत्र कम आने (यह सामान्य कारण है) अथवा मूत्र अधिक बनने से सामान्य स्तर भंग होता है, तो यूरिक अम्ल का रक्त स्तर बढ़ जाता है और यूरिक अम्ल के क्रिस्टल भिन्न-भिन्न जोड़ों पर जमा (जोड़ों के स्थल) हो जाते है। रक्षात्मक कोशिकाएं इन क्रिस्टलों को ग्रहण कर लेते हैं जिसके कारण जोड़ों वाली जगहों पर दर्द देने वाले पदार्थ निर्मुक्त हो जाते हैं। इसी से प्रभावित जोड़ खराब होते हैं-
संकेत और लक्षण
सभी गठिया विकारों के लिए आम लक्षण दर्द के विभिन्न स्तरों शामिल हैं, सूजन, जोड़ों की कठोरता और कभी कभी संयुक्त (एस) के चारों ओर एक निरंतर दर्द. एक प्रकार का वृक्ष और रुमेटी गठिया जैसी बीमारियों के भी लक्षण के एक किस्म के साथ शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर सकते हैं.
  • हाथ का उपयोग करने के लिए या चलने में असमर्थता
  • अस्वस्थता और थकान का अहसास
  • बुखार
  • नींद कम आना
  • मांसपेशियों में दर्द और बदन दर्द
  • चलते समय कठिनाई होना
  • मांसपेशियों में कमजोरी
  • लचीलेपन की कमी
  • एरोबिक फिटनेस में कमी
गठिया रोग प्रमुख कारण
  • औरतों में एसट्रोजन की कमी के कारण भी अर्थराइटिस होता है।
  • थइराइड में विकार के कारण भी यह बीमारी होती है।
  • त्वचा या खून की बीमारी जैसे ल्यूकेमिया आदि होने पर भी जोड़ों में दोष पैदा हो जाता है।
  • अधिक खन-पान और शारीरिक कामों में कमी के कारण, शरीर में आयरन और कैल्शियम की अधिकता होने से भी यह रोग हो सकता है।
  • कई बार शरीर के दूसरे अंगों के संक्रमण भी जोड़ों को प्रभावित करते हैं जैसे टाइफायड या पैराटाइफायड में बीमारी के कुछ हफ़्तों बाद घुटनों आदि में दर्द हो सकता है।
  • आतों को प्रभावित करने वाले रिजाक्स नामक किटाणु जोड़ों में भी विकार पैदा करते हैं।
  • पोषण की कमी के कारण , खा़सतौर से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से रिह्यूमेटायड आर्थराइटिस होता है जिससे जोड़ों में दर्द , सूजन गांठों में अकड़न आ जाती है।
आप सभी से मेरा अनुरोध है कि इस किसी एक लक्षण के होने पर कृपया करके आप तुरंत डा० से सम्पर्क करें , जिससे आप को यदि यह रोग हो रहा हो तो आरंभिक अवस्था में ही इससे छुटकारा मिल जाए।

तो दोस्तों आपको कैसे लगा ये पोस्ट। ... अपना सुझाओ जरूर लिखे 

धन्यवाद 
आपका अपना। ....... अजय पाण्डेय 

Tuesday, 26 January 2016

हमारा देश भारत। ..... एक नज़र में।

हमारा देश भारत। ..... एक नज़र में।


भारत का राष्ट्रीय ध्वज - तिरंगा
भारत का राष्ट्रीय गान - जन-गन-मन
भारत का राष्ट्रीय गीत - वन्दे मातरम्
भारत का राष्ट्रीय चिन्ह - अशोक स्तम्भ.
भारत का राष्ट्रीय पंचांग - शक संवत
भारत का राष्ट्रीय वाक्य - सत्यमेव जयते
भारत की राष्ट्रीयता - भारतीयता
भारत की राष्ट्र भाषा - हिंदी
भारत की राष्ट्रीय लिपि - देव नागरी
भारत का राष्ट्रीय ध्वज गीत - हिंद देश
का प्यारा झंडा
भारत का राष्ट्रीय नारा - श्रमेव जयते
भारत की राष्ट्रीय विदेशनीति -गुट निरपेक्ष
भारत का राष्ट्रीय पुरस्कार - भारत रत्न
भारत का राष्ट्रीय सूचना पत्र - श्वेत पत्र
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष - बरगद
भारत की राष्ट्रीय मुद्रा - रूपया
भारत की राष्ट्रीय नदी - गंगा
भारत का राष्ट्रीय पक्षी - मोर
भारत का राष्ट्रीय पशु - बाघ
भारत का राष्ट्रीय फूल - कमल
भारत का राष्ट्रीय फल - आम
भारत की राष्ट्रीय योजना - पञ्च वर्षीय योजना
भारत का राष्ट्रीय खेल - हॉकी
भारत की राष्ट्रीय मिठाई - जलेबी
भारत के राष्ट्रीय पर्व 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस).



भारत का संक्षिप्त इतिहास
563 : गौतम बुद्ध का जन्‍म
540 : महावीर का जन्‍म
327-326 : भारत पर एलेक्‍जेंडर का हमला। इसने भारत और यूरोप के बीच एक भू-मार्ग खोल दिया
313 : जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्‍त का राज्‍याभिषेक
305 : चंद्रगुप्‍त मौर्य के हाथों सेल्‍युकस की पराजय
273-232 : अशोक का शासन
261 : कलिंग की विजय
145-101 : एलारा का क्षेत्र, श्रीलंका के चोल राजा
58 : विक्रम संवत् का आरम्‍भ
78 : शक संवत् का आरम्‍भ
120 : कनिष्‍क का राज्‍याभिषेक
320 : गुप्‍त युग का आरम्‍भ, भारत का स्‍वर्णिम काल
380 : विक्रमादित्‍य का राज्‍याभिषेक
405-411 : चीनी यात्री फाहयान की यात्रा
415 : कुमार गुप्‍त-1 का राज्‍याभि‍षेक
455 : स्‍कंदगुप्‍त का राज्‍याभिषेक
606-647 : हर्षवर्धन का शासन
712 : सिंध पर पहला अरब आक्रमण836 : कन्‍नौज के भोज राजा का राज्‍याभिषेक
985 : चोल शासक राजाराज का राज्‍याभिषेक
998 : सुल्‍तान महमूद का राज्‍याभिषेक
1000 से 1499
1001 : महमूद गजनी द्वारा भारत पर पहला आक्रमण, जिसने पंजाब के शासक जयपाल को हराया था
1025 : महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर का विध्‍वंस
1191 : तराई का पहला युद्ध
1192 : तराई का दूसरा युद्ध
1206 : दिल्‍ली की गद्दी पर कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्‍याभिषेक
1210 : कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्‍यु
1221 : भारत पर चंगेज खान का हमला (मंगोल का आक्रमण)
1236 : दिल्‍ली की गद्दी पर रजिया सुल्‍तान का राज्‍याभिषेक
1240 : रजिया सुल्‍तान की मृत्‍यु
1296 : अलाउद्दीन खिलजी का हमला
1316 : अलाउद्दीन खिलजी की मृत्‍यु
1325 : मोहम्‍मद तुगलक का राज्‍याभिषेक
1327 : तुगलकों द्वारा दिल्‍ली से दौलताबाद और फिर दक्‍कन को राजधानी बनाया जाना
1336 : दक्षिण में विजयानगर साम्राज्‍य की स्‍थापना
1351 : फिरोजशाह का राज्‍याभिषेक
1398 : तैमूरलंग द्वारा भारत पर हमला
1469 : गुरुनानक का जन्‍म
1494 : फरघाना में बाबर का राज्‍याभिषेक
1497-98 : वास्‍को-डि-गामा की भारत की पहली यात्रा (केप ऑफ गुड होप के जरिए भारत तक समुद्री रास्‍ते की खोज)
1500 से 1799
1526 : पानीपत की पहली लड़ाई, बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया- बाबर द्वारा मुगल शासन की स्‍थापना
1527 खानवा की लड़ाई, बाबर ने राणा सांगा को हराया
1530 : बाबर की मृत्‍यु और हुमायूं का राज्‍याभिषेक
1539 : शेरशाह सूरी ने हुमायूं का
हराया और भारतीय का सम्राट बन गया
1540 : कन्‍नौज की लड़ाई
1555 : हुमायूं ने दिल्‍ली की गद्दी को फिर से हथिया लिया
1556 : पानीपत की दूसरी लड़ाई
1565 : तालीकोट की लड़ाई
1576 : हल्‍दीघाटी की लड़ाई- राणा प्रताप ने अकबर को हराया
1582 : अकबर द्वारा दीन-ए-इलाही की स्‍थापना
1597 : राणा प्रताप की मृत्‍यु
1600 : ईस्‍ट इंडिया कंपनी की स्‍थापना
1605 : अकबर की मृत्‍यु और जहाँगीर का राज्‍याभिषेक
1606 : गुरु अर्जुन देव का वध
1611 : नूरजहाँ से जहांगीर का विवाह
1616 : सर थॉमस रो ने जहाँगीर से मुलाकात की
1627 : शिवाजी का जन्‍म और जहांगीर की मृत्‍यु
1628 : शाहजहां भारत के सम्राट बने
1631 : मुमताज महल की मृत्‍यु
1634 : भारत के बंगाल में अंग्रेजों को व्‍यापार करने की अनुमति दे दी गई
1659 : औरंगजेब का राज्‍याभिषेक, शाहजहाँ को कैद कर लिया गया
1665 : औरंगजेब द्वारा शिवाजी को कैद कर लिया गया
1680 : शिवाजी की मृत्‍यु
1707 : औरंगजेब की मृत्‍यु
1708 : गुरु गोबिंद सिंह की मृत्‍यु
1739 : नादिरशाह का भारत पर हमला
1757 : प्‍लासी की लड़ाई, लॉर्ड क्‍लाइव के हाथों भारत में अंग्रेजों के राजनीतिक शासन की स्‍थापना 1761पानीपत की तीसरी लड़ाई, शाहआलम द्वितीय भारत के सम्राट बने.




 💐महान हस्तियों का जन्म💐
Jan...
 12-1-1863 स्वामी विवेकानंद
28-1-1865 लाला लजपतराय
1-1-1894 जगदीश चंद्र बोंज
23-1-1897 सुभाष चंद्र बोंज
13-1-1949 राकेश शर्मा
20-1-1900 जनरल के.ऍम.    करिअप्पा
------------------------------------------
Feb...

18-2-1486 महाप्रभु चेतन्य
18-2-1836 रामकुष्ण परमहंस
22-2-1873 मोहम्मद इकबाल
13-2-1879 सरोजिनी नायडु
29-2-1896 मोरारजी देसाइ
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March...

23-3-1910 डॉ. राममनोहर लोहिया
------------------------------------------
April...

15-4-1469 गुरु नानक देवजी
14-4-1563 गुरु अर्जुन देवजी
14-4-1891 डॉ.भीमराव                   आंबेडकर
------------------------------------------
May...

5-5-1479   गुरु अमरदास
31-5-1539 महाराणा प्रताप
6-5-1861   मोतीलाल नेहरु
7-5-1861   रविन्द्रनाथ टेगोर
9-5-1866   गोपालकृष्ण गोखले
24-5-1907 महादेवी वर्मा
2-5-1921   सत्यजित राय
------------------------------------------
Jun...

26-6-1838 बंकिमचंद्र चट्टो         पाध्याय
------------------------------------------
July...

23-7-1856 लोकमान्य तिलक
31-7-1880 प्रेमचंद मुनशी
29-7-1904 जे. आर. डी. टाटा
------------------------------------------
Aug...

27-8-1910  मधर टेरेसा
29-8-1905  ध्यानचंद
------------------------------------------
Sept...

26-9-1820 ईश्वरचंद्र           विद्यासागर
4-9-1825  दादाभाई नवरोजी
10-9-1887 गोविंद वल्लभ पंत
5-9-1888  डॉ. राधाकृष्ण
11-9-1895 विनोबा भावे
27-9-1907 भगतसिंह
15-9-1861 ऍम.विश्वसरेइया
15-9-1876 शरदचंद्र चटोपाध्याय
------------------------------------------
Oct...

1-10-1847 डॉ. ऐनी.बेसन्ट
2-10-1869 महात्मा गांधीजी
22-10-1873 स्वामी रामतीर्थ
31-10-1875 सरदार वल्लभभाई पटेल
31-10-1889 आचार्य नरेन्द्रदवे
11-10-1902 जयप्रकाश नारायण
30-10-1909 डॉ. होमी भाभा
19-10-1920 पांडुरंग शास्त्रीजी
आठवले पु. दादा
------------------------------------------
Nove...

13-11-1780 महाराणा रणजीतसिंह
4-11-1845 वासुदेव बळवंत फडके
7-11-1858 बिपिनचंद्र पाल
30-11-1858 जगदीशचंद्र बोज
5-11-1870 देशबंधु चितरंजनदास
11-11-1888 मौलाना आज़ाद
4-11-1889 जमनालाल बजाज
19-11-1917 श्रीमती इंदिरागांधी
23-11-1926 श्री सत्यसाई बाबा
4-11-1939 शकुंतलादेवी
12-11-1896 सलीमअली
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Des...

9-12-1484 महाकवि सूरदास
25-12-1861 मदनमोहन मालविया
27-12-1869 ठक्कर बापा
7-12-1879 चक्रवर्ती राजगोपालचारी
3-12-1884 डॉ. राजेन्द्रप्रसाद
30-12-1887 कनैयालालमुनशी
11-12-1931 राजेन्द्रकुमार जेन ओसो रजनीश
22-12-1887 रामानुजम



🌷 भारत के प्रमुख पदाधिकारी 🌷
📍📍📍📍📍📍📍📍📍
💕 * राष्ट्रपति
🚥 श्री प्रणब मुखर्जी

💕 * उप राष्ट्रपति
🚥 श्री हामिद अंसारी

💕 * प्रधान मंत्री
🚥 श्री नरेंदर मोदी

💕 * लोकसभा अध्यक्ष
🚥 श्रीमती सुमित्रा महाजन

💕 * सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायधीश
🚥 श्री एच एल दत्तू

💕 * राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष
🚥 श्री के. जी.बाल क्रष्णन

💕 * राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष
🚥 श्रीमती कुमारमंगलम्

💕 * मुख्य चुनाव आयुक्त
🚥 श्री एच एस ब्रम्हा

💕 * अटार्नी जनरल
🚥 श्री मुकुल रोहतगी

💕 * सोलिसिटर जनरल
🚥 श्री रनजीत कुमार

💕 * राष्ट्रीय विधि आयोग के अध्यक्ष
🚥 श्री ए पी शाह

💕 * राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
🚥 श्री अजीत कुमार डोवल





📍〽📍〽📍〽📍〽📍〽📍〽📍〽📍〽📍〽
भारत के सभी राज्यों के वर्तमान मुख्यमंत्री
**********************************************
राज्य ---- मुख्यमंत्री
तेलंगाना ----- के चंद्रशेखर राव
आन्ध्र प्रदेश ---- चन्द्रबाबू नायडू
अरुणाचल प्रदेश ---- नबम तुकी
असम ---- तरुण गोगोई
बिहार ........नितिश कुमार
छत्तीसढ ---- रमन सिंह
दिल्ली ------ अरविंद केजरीवाल
गोआ ----- लक्ष्मीकांत परेस्कर
गुजरात ----- आनंदीबेन पटेल
हरियाणा ----- मनोहर लाल खट्टर
हिमाचल प्रदेश ----- वीरभद्र सिंह
जम्मू और कश्मीर ----- मुफ्ती मुहम्मद
झारखण्ड ---- रघुवर दास
कर्नाटक ----- सिद्धारैया
केरल ------ ओमान चांडी
मध्य प्रदेश ------ शिवराज सिंह चौहान
महाराष्ट्र ----- देवेन्द्र फड़नवीस
मणिपुर ----- ओकराम इबोई सिंह
मेघालय ----- मुकुल संगमा
मिज़ोरम पु ----- ललथानवाला
नागालैण्ड ----- टी आर जेलियांग
ओडिशा ----- नवीन पटनायक
पॉण्डिचेरी ---- एन. रंगास्वामी
पंजाब ---- प्रकाश सिंह बादल
राजस्थान ---- वसुंधरा राजे सिंधिया
सिक्किम ---- पवन कुमार चामलिंग
तमिलनाडु ----ओ. पनीरसेल्वम्
त्रिपुरा ------ माणिक सरकार
उत्तराखण्ड ------ हरीश रावत
उत्तर प्रदेश ------ अखिलेश यादव
पश्चिम बंगाल ------ ममता बनर्जी
:::::: 🔴पंचायती राज🔴:::::::

🔴 संविधान के किस भाग में पंचायती राज व्यवस्था का वर्णन है—👉 भाग-9

🔴पंचायती राज व्यवस्था किस पर आधारित है—👉 सत्ता के विकेंद्रीकरण पर

🔴 पंचायती राज का मुख्य उद्देश्य क्या है— 👉जनता को प्रशासन में भागीदारी योग्य बनाना

🔴किसके अंतर्गत पंचायती राज व्यवस्था का वर्णन है— 👉नीति-निर्देशक सिद्धांत

🔴 संविधान के किस संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया है— 👉75वें संशोधन

🔴75वें संशोधन में कौन-सी अनुसूची जोड़ी गई हैं— 👉11वीं

🔴पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचन हेतु कौन उत्तरदायी है— 👉राज्य निर्वाचन आयोग

🔴 भारत में पंचायती राज अधिनियम कब लागू हुआ— 👉25 अप्रैल, 1993

🔴सर्वप्रथम पंचायती राज व्यवस्था कहाँ लागू की गई— 👉नागौर, राजस्थान में

🔴 राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था कहाँ लागू की गई— 👉1959 को

🔴देश के सामाजिक व सांस्कृतिक उत्स्थान के लिए कौन-सा कार्यक्रम चलाया गया—👉 सामुदायिक विकास कार्यक्रम

🔴 भारत में सामुदायिक विकास कार्यक्रम कब आरंभ हुआ— 👉2 अक्टूबर, 1952

🔴 किसकी सिफारिश पर भारत में पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना की गई 👉बलवंत राय मेहता समिति

🔴पंचायती राज की सबसे छोटी इकाई क्या है— 👉ग्राम पंचायत

🔴 बलवंत राय समिति के प्रतिवेदन के अनुसार महत्वपूर्ण संस्था कौन-सी है— 👉पंचायत समिति

🔴 पंचायती राज संस्थाओं के संगठन के दो स्तर होने का सुझाव किसने दिया था— 👉अशोक मेहता समिति

🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴
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   🌹नदियों के किनारों पर बसे
         विश्व के प्रमुख नगर🌹

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🍭 नगर   👉  नदी
 〰🔸〰🔸〰
🍭 मास्को 👉 मोस्कवा नदी
🍭 कोलम्बो 👉 केलानी नदी
🍭 बगदाद 👉 टिगरिस नदी
🍭नई दिल्ली 👉 य मुनानदी
🍭बेलग्रेड 👉 डेन्यूब नदी
🍭आगरा 👉 यमुनानदी
🍭 बर्लिन 👉 स्ट्री नदी
🍭 हरिद्वार 👉 गंगा नदी
🍭 बुडापेस्ट 👉 डेन्यूब नदी
🍭 कानपुर 👉 गंगानदी
🍭 काहिरा 👉 नील नदी
🍭 नासिक 👉 गोदावरी नदी
🍭 करांची  👉 सिन्धु नदी
🍭 उज्जैन 👉 क्षिप्रा नदी
🍭 लन्दन 👉  टेम्स नदी
🍭 श्रीनगर 👉 झेलमनदी
🍭 लाहौर 👉 रावी नदी
🍭 इलाहाबाद 👉 गंगा-यमुना
🍭 न्यूयार्क 👉 हडसन नदी
🍭 अहमदाबाद 👉 साबरमती
🍭 पेरिस 👉 सीन नदी
🍭 कोलकात्ता 👉  हुगली
🍭 रोम 👉 टाईबर नदी
🍭 गुवाहाटी 👉 ब्रह्मपुत्र
🍭 शंघाई 👉 यांगटिसिक्यांग
🍭 जबलपुर 👉 नर्मदा
🍭टोकियो  👉 सुमीदा नदी
🍭 सूरत 👉 ताप्ती
🍭 विएना 👉  डेन्यूब नदी  o
🍭 हैदराबाद 👉  मूसी
🍭 वारसा  👉 विस्तुला न दी
🍭 लखनऊ 👉 गोमती
🌹शक्तावतो का गुडा👉सौम नदि
 वाशिंगटन 👉 पोटोमेक नदी ।
🌹🌹🌱🌱🌱🌱🌹

छोटी छोटी बातें

छोटी-छोटी बातें और व्यक्तित्व की पूर्णता



कई बार कई चीजें अक्सर हमारे सामने होती हैं लेकिन हम इन पर ध्यान नहीं देते या इन्हें देखकर भी नजरअंदाज कर देते हैं.
ऐसा ही एक अंग्रेजी quote है ....  "Small Things Makes Perfection".
दोस्तों आइए आज की ब्लॉग पोस्ट में इस English Quote पर Hindi (हिंदी) में कुछ चर्चा करते हैं.

छोटी-छोटी बातें :
जिंदगी में कई बार कई छोटी-छोटी बातें बड़ी बातों को अधिक महत्व देने के कारण छोटी ही रह जाती हैं और हमारे व्यक्तित्व या कर्मक्षेत्र में हम बड़े-बड़े कामों को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बावजूद भी कुछ छोटी-छोटी बातों में अपूर्ण रह जाते हैं. यही छोटी-छोटी बातें हमारे व्यक्तित्व की छोटी-छोटी कमियां बन जाती हैं. फिर कमी तो कमी ही रहती है और दूसरे लोगों को हम पर आरोप लगाने का अवसर मिल जाता है कि देखो फलां व्यक्ति ने यह नहीं किया या फलां व्यक्ति इतना छोटा सा काम भी नहीं कर सकता.

छोटी-छोटी मगर मोटी बातें:
अगर हम ध्यान दें तो कई बार छोटी-छोटी बातों से हमें बड़े-बड़े राज मिल जाते हैं. कुछ लोग छोटे सी बात में ही बहुत मोटी बात कह जाते हैं. अगर हमने इस पर ध्यान दिया तो हमें जिन्दगी में बहुत काम की बात मिल जाती है और अगर हमने छोटी बात समझ कर इसे नजरअंदाज कर दिया तो हम चूक जाते हैं. कुछ समझदार लोग बहुत गूढ़ बात को छोटी और साधारण सी लगने वाली बात के माध्यम से कहते हैं. समझदार के लिए इशारा काफी होता है. अगर यहाँ भी चूके तो हो गया नुकसान.

छोटी-छोटी चीजें
हम में से कई लोगों का अनुभव होगा कि बाजार जाते समय ध्यान रहता है कि ये-ये  चीजें लाना है और बाजार जाकर बड़ी बड़ी चीजें तो सब ले आते हैं और छोटो-छोटी चीजें भूल जाते है. अगर ऐसा कभी-कभार हो तब तो कोई बात नहीं और अगर अक्सर होने लगे तो यहीं से एक खराब आदत की शुरुआत होती है और हम एक गैर जिम्मेदार व्यक्ति की तरह समझे जाने लगते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर चीज महत्वपूर्ण होती है चाहे वह छोटी हो या बड़ी.

छोटी-छोटी सी जिम्मेदारी:
मित्रों, आपने छोटे-छोटे बच्चों को होमवर्क करते देखा ही होगा. कभी आपने गौर किया कि वो अपनी पेंसिल, कापी, बैग आदि की देखभाल कितने व्यवस्थित ढंग से करते है. कोई एक किताब का काम पूरा होने के बाद पहले उसे बड़ी चिंता से बैग में रखेंगे फिर दूसरी निकालेंगे. छोटे बच्चों से हमें कई बड़ी-बड़ी बातें सीखने को मिलती हैं मगर हम में से कई लोग बड़े होकर कई बार कितने लापरवाह और अव्यवस्थित हो जाते हैं. हो सकता है बड़े होने पर हम पर जिम्मेदारियां और कार्य भार अधिक आ जाने के कारण ऐसा होता हो. मगर कई बार जब हमें जिम्मेदार और एकाग्र चित्त वाले व्यक्तियों से वास्ता पड़ता है तो कितना कुछ सीखने को मिलता है.

छोटी-छोटी चीजों से पूर्णता.....
कोई भी काम छोटे-छोटे स्टेप्स से मिल कर ही पूरा होता है. और अगर हम हर छोटे से छोटे काम को भी पूरी कुशलता और ध्यान से करें तो निशित ही हमें लाभ होगा. छोटा या साधारण समझ कर किसी जरुरी काम को नजरअंदाज करने का मतलब है कि हम छोटे छोटे कारणों से असफलता की और जा रहे हैं. यह कथन निश्चित ही बहुत महत्व का है कि “छोटी-छोटी बातों का भी उचित ध्यान रखना चाहिए”.

       मित्रों मेरी यह हिंदी पोस्ट आपको कैसी लगी? अपने अमूल्य विचारों से अवश्य अवगत करायें. आपकी छोटी सी टिप्पणी भी अजय पाण्डेय के लिये बहुत महत्वपूर्ण है...

धन्यवाद

हमारा घर.....


हमारा घर ही सबसे बड़ा मंदिर है


हेलो दोस्तों। .... 

लोग पुण्य कमाने के लिए तीरथ करते हैं, देवताओं को पूजने मंदिर जाते हैं, लेकिन घर में मौजूद जीते-जागते देवताओं को नज़रअंदाज़ करते हैं। यहां तक कि तिरस्कार भी करते हैं। शास्त्रों में कहा है, मातृ देवो भव: पितृ देवो भव:! अर्थात माता-पिता देवतुल्य हैं। जिस प्रकार परमात्मा हर तरह से हमारी देखभाल करते हैं, उसी तरह माता-पिता भी अपने बच्चों की जान से बढ़ कर हिफाज़त करते हैं। उनके लाड-प्यार में कोई कमी नहीं रखते। श्री राम प्रात: उठते ही प्रथम वंदन माता-पिता को करते थे। रामचरितमानस में गोस्वामी जी उसका वर्णन करते हैं : प्रात:काल उठि रघुराई। प्रथम मात पितु शीश नवाई।। यह परंपरा आज भी सभ्य घरानों में कायम है। महाभारत में प्रसंग है कि जब यक्ष ने युधिष्ठिर से प्रश्न पूछा कि पृथ्वी से भारी क्या है? तो युधिष्ठिर ने यही बताया कि पृथ्वी से भारी मां होती है। यह उत्तर सही था, अन्यथा उन पर भी यक्ष का शाप पड़ता। सचमुच मां अपने बच्चों को जितना प्रेमी देती है, उनका जितना हित चाहती है, उतना अन्य कोई नहीं कर सकता। शास्त्रों में मां को सर्वतीर्थमयी बताया गया है, क्योंकि सारे तीर्थ घूमने का फल मात्र मां की सेवा-वंदना करने से मिल जाता है। गणेश और कार्तिकेय में जब श्रेष्ठता की होड़ लगी तो गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा करके ही त्रिभुवन की परिक्रमा का यश पाया। जिनके मां-बाप जीवित नहीं होते, उनके यहां उनकी तस्वीर होती है। अनेक लोग अपने दैनिक कामकाज की शुरुआत करने के पहले रोज़ प्रात: उनको नमन करते हैं। इससे आने वाली पीढ़ी यानी उनके बच्चे भी सीखते हैं कि माता-पिता वंदनीय हैं। घर के मंदिर में भाई-बहनों के बीच जो आपसी प्रेम और ममता देखने को मिलती है, उसी की महानता देख कर परमात्मा की वंदना के लिए यह सूत्र गढ़ा गया है : त्वमेव बंधुश्चसखा त्वमेव! इस तरह भाई-बहन भी एक-दूसरे के लिए देवतुल्य होते हैं। उनमें कोई भेदभाव और वैमनस्य नहीं होना चाहिए, तभी तो घर मंदिर का वातावरण पवित्र और सुखदायी होगा। हमारे धर्मग्रंथों में धन और ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मी को बताया गया है। और घर की नारी को गृह लक्ष्मी कहा गया है, क्योंकि परिवार का सारा दारोमदार उसी के कंधों पर होता है। यदि गृहलक्ष्मी खुश है तभी घर रूपी मंदिर के शेष देवी-देवता खुश रह सकते हैं। किसी घर में यदि बहू या पत्नी का ही आदर नहीं हो, तो वह घर मंदिर कैसे बनेगा? हमारे शास्त्रों की यह पंक्ति बहुत चर्चित है कि यत्र नार्यस्तु न पूज्यंते, रमंते तत्र न देवता:। यह पद सिर्फ देश या समाज के ही लिए नहीं, घर की चारदीवारी या परिवार के लिए भी है। जब घर की नारी (दादी हो, मां हो, बहन या बेटी हो, बहू या बुआ या मामी-चाची हों) का ही आदर नहीं होगा, तो वहां चाहे जितनी पूजा-पाठ हो, वहां का माहौल अच्छा (देवताओं के रहने योग्य) नहीं हो सकता। नवरात्रों में कन्या या कंजक जिमाने से क्या होगा यदि घर में बेटियां और बहनें दोयम दर्जे की समझी जाती हैं। आगे लिखा है- अतिथि देवो भव! माता-पिता के बाद अतिथि को देव स्वरूप कहा गया है। घर में कोई मेहमान आता है, तो कितनी खुशी होती है। उसकी आवभगत के लिए सभी सदस्य जुट जाते हैं। आज ग्लोबलाइज़ेशन के युग में ये बातें धूमिल हो रही हैं और घर को मात्र चारदीवारी ही समझ लिया गया है। उन दीवारों को हम खूब सजाते हैं, सोफा-पलंग बिछाते हैं, लेकिन वहां मंदिर का वातावरण नहीं बनाते। घर तो वास्तव में मंदिर से भी बढ़कर है, तीर्थ से भी श्रेष्ठ है, क्योंकि वहां जीते-जागते देवता विराजमान होते हैं। यदि इस बात को समझ लेते हैं तो घर में ही स्वर्ग का साम्राज्य स्थापित कर सकते हैं, जो कि आज के युग में नरक बनता जा रहा है।



धन्यवाद.... 
आपका अपना
अजय पाण्डेय 

परिवार के प्रति कर्तव्य


परिवार के प्रति कर्तव्य



प्रिया दोस्तों ,

परिवार हृदय का देश है। प्रत्येक परिवार में देवदूत होता है जो अपनी कृपा से, अपनी मिठास से, अपने प्रेम से परिवार के प्रति कर्तव्य को निभाने में थकावट को नहीं आने देता तथा दुखों को बाँटने में सहायक होता है। बिना किसी उदासी के यदि शुद्ध प्रसन्नता का अनुभव होता है तो वह इस देवदूत की ही देन है। जिन व्यä किे दुर्भाग्य से परिवार का सुख देखने को नहीं मिल पाया, उस के हृदय में एक अनजानी उदासी बनी रहती है। उस के हृदय में ऐसी शून्यता भरी रहती है जिसे भरा नहीं जा सकता। जिन के पास यह सुख है, उन्हें इस के महत्व का अहसास नहीं होता तथा वह अनेक छोटी छोटी बातों में अधिक सुख मानते हैं। परिवार में एक सिथरता रहती है जो कहीं अन्य नहीं पार्इ जाती। हम उन के प्रति जागरूक नहीं होते क्योंकि वह हमारा ही भाग हैं तथा अपने आप को जानना कठिन है। पर जब इस का साथ छूट जाता है तो ही इस के महत्व का पता चलता है। क्षणिक सुख तो मिल जाते हैं किन्तु स्थार्इ सुख नहीं मिल पाता। परिवार की शाँति उसी प्रकार की है जैसे झील पर की हलकी लहर, विश्वास भरी नींद की मीठा अनुभव, वैसा ही जैसा बच्चे को अपनी माँ की छाती से लग कर मिलता है। 

यह देवदूत स्त्री है। माँ के रूप में, पतिन के रूप में या बहन के रूप में। स्त्री ही वह शä हिै जो जीवन प्रदायिनी है, वह ही उस परम पिता की संदेशवाहिनी है जो सारी सृषिट को देखता है। उस में किसी भी दुख को दूर करने का शä हिै। वह ही भविष्य निर्माता है। माँ का प्रथम चुम्बन बच्चे को प्रेम की शिक्षा देता है। जवानी में उस का चुम्बन ही पुरुष को जीवन में विश्वास जगाने में सहायक होता है। इस विश्वास में ही जीवन को सम्पूर्ण बनाने की शä छिुपी हुर्इ है। भविष्य को उज्जवल बनाने की कला है। वह ही हमारे तथा हमारी अगली पीढि़यों के बीच की कड़ी है। इस कारण ही हमारे पूर्वजों ने स्त्री को पूज्य माना है। 

परन्तु आज समाज में स्त्री के प्रति आदर की वह भावना विलुप्त सी हो गर्इ है। जहाँ एक ओर वह व्यवसाय के हर क्षेत्र में पुरुष के समकक्ष अपने को सिद्ध कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसे प्रदर्शन की वस्तु बनाने की भी होड़ लगी हुर्इ है। चल चित्र तथा दूरदर्शन चैनल द्वारा सस्ती लोक प्रियता प्राप्त करने के लिये उस का शोषण किया जा रहा है। इस भौंडे प्रदर्शन का विपरीत प्रभाव युवकों पर पड़ रहा है तथा इस के परिणामस्वरूप स्त्री के प्रति अपराधों की संख्या में वृद्धि हो रही है। पाश्चात्य जगत की अन्धाधुन्ध नकल के कारण सुन्दरता के मापदण्ड ही परिवर्तित हो गये हैं। भारत में सदैव आन्तरिक सौन्दर्य को उच्च माना है। यह स्त्री तथा पुरुष दोनों पर लागू होता है। यह बात स्पष्ट है कि स्त्री किसी भी अर्थ में पुरुष से कम नहीं है। तथा इस कारण उस का व्यवसाय में आना स्वाभाविक है। पूर्व में उसे अन्यायपूर्वक इस से वंचित रखा गया है परन्तु उस सिथति का समाप्त होना स्वागत योग्य है। सामाजिक सम्बन्ध, शिक्षित होने की शä,ि प्रगति करने की इच्छा एक समान है तथा यही मानवता की पहचान है। स्त्री को परिवार का पोषक मानना ही परिवार के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रथम पायदान है। स्त्री का आदर ही परिवार के प्रति कर्तव्य का अंग है। उस की शä,ि उस की प्रेरणा ही परिवार के विशिष्टता है। 

परिवार का दूसरा अंग उस के बच्चे हैं। बच्चों के प्रति प्रेम करना कर्तव्य है क्योंकि उन्हें र्इश्वर ने आप के पास भेजा है मानवता की प्रगति के लिये। परन्तु यह प्रेम सत्य पर आधारित तथा गम्भीर होना चाहिये। केवल अन्धा प्रेम किसी काम का नहीं है। यह मत भूलो कि बच्चों के रूप में हम अगली पीढ़ी के प्रभार में हैं। उन्हें र्इश्वर के प्रति तथा मानवता के प्रति कर्तव्य का बोध कराना है। उन्हें जीवन के विलास तथा लालच से ही अवगत नहीं कराना है वरन जीवन के सही अथोर्ं का बोध कराना है। कुछ अमीर घरानों में बच्चोंं को किसी भी कीमत पर आगे बढ़ने की शिक्षा दी जाती हैं जो र्इश्वरीय कानून का उल्लंघन है, परन्तु अधिकाँश लोग इस प्रवृति के नहीं हैं। बच्चे परिवार के उदाहरण से ही सीखें गे अत: प्रतयेक सदस्य को अपने चरित्र से यह प्रशिक्षण देने का प्रयास करना हो गा। बच्चे परिवार के ही समान हों गे। परिवार का मुखिया भ्रष्ट है तो वे भी भ्रष्ट ही हों गे। यदि परिवार का मुखिया विलासिता का जीवन बिता रहे है तो बच्चों को सादगी का पाठ कैसे पढ़ा पाये गा।  यदि परिवार के सदस्यों की भाषा संयत नहीं है तो बच्चों से कैसे अपेक्षा की जाये गी कि वे सुन्दर भाषा में, प्रिय भाषा में बात करें। 

बच्चों को शिक्षा देने के लिये देश की महान संस्कृति का सहारा लिया जा सकता है। उन्हें महापृरुषों के जीवन कथाओं के बारे में बताया जा सकता है। उन को बतलाया जा सकता है कि किस प्रकार हमारे पूर्वजों ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया। अन्याय के प्रति घृणा उत्पन्न करना गल्त नहीं है। देश को इस प्रयास में परिवार की सहायता करना चाहिये परन्तु ऐसा न भी हो तो भी अपने कर्तव्य को निभाते जाना है। इस के लिये स्वयं को शिक्षित करना हो गा। इस कारण स्वाध्याय करना हो गा। उस पर चिन्तन, मनन करना हो गा तथा उसे सरल भाषा में बच्चे तक पहुँचाना हो गा। 

परिवार का आरम्भ माता पिता से होता है। उन का आदर करना कर्तव्य है। जिस परिवार में आप फले फूले, उस के पोषक को, उन के कर्तव्य पालन को, उन के अपने कर्तव्य को अपनी शä किे अनुसार निभाने का स्मरण रखना हो गा। कर्इ बार नये सम्बन्ध पुराने सम्बन्धों को पीछे छोड़ देते हैं। परन्तु वास्तव में यही सम्बन्ध गत पीढ़ी की तथा आने वाली पीढ़ी की कड़ी है। 

परिवार मनुष्य द्वारा निर्मित नहीं है। वह र्इश्वरीय कृपा है। संसार की कोर्इ शä इिस बंधन को तोड़ नहीं सकती। परिवार देश से भी अधिक पवित्र है। वह जीवन है। देश सम्भवत: एक दिन विश्व में विलीन हो जाये गा जब मनुष्य मानवता के प्रति अपने कर्तव्य को समझ जाये गा परन्तु परिवार का असितत्व स्थापित रहे गा। परिवार मानवता का ही प्रतीक है। इस की प्रगति ही हमारी प्रगति है। परिवार को अधिक से अधिक जीवन्त बनाना तथा इसे देश की, मानवता की प्रगति का साधन बनाना ही हमारा लक्ष्य, हमारा कर्तव्य है। देश का कर्तव्य है कि वह मनुष्य को शिक्षित करे। परिवार का दायित्व है कि वह उसे अच्छा नागरिक बनने की प्रेरणा दे। देश तथा परिवार एक ही रेखा के दो सिरे हैं। पर जब परिवार में स्वार्थ भावना आ जाती है तो पूरा संतुलन बिगड़ जाता है। 

माता पिता, बहन भार्इ, पतिन, बच्चे सभी परिवार की शाखायें हैं। इस परिवार रूपी पेड़ की सिंचार्इ प्रेम रूपी जल से ही होती है। घर को मंदिर बनाना है। भले ही इस में प्रसन्नता न हो पाये परन्तु यह गारण्टी है कि विपरीत सिथति से निपटने में अधिक मज़बूती प्राप्त हो गी। इस में आप का वह शä मिले गी जो आप के जीवन को उज्जवल बनाये गी। परिवार समाज की मूल र्इकार्इ है। इस की प्रगति ही समाज की, मानव मात्र की प्रगति है। इस के लिये सदैव प्रयत्नशील रहना है। यही परिवार के प्रति आप का कर्तव्य है।



धन्यवाद। ....... ........
 अजय पाण्डेय

सफलता ?

दोस्तों। ...... एक बार आप का फिर से स्वागत है आपके अपने ब्लॉग में। 



  • सफलता और मौत दोनों आसानी से नहीं प्राप्त होती। इन्हें प्राप्त करने के लिए या तो अपने शरीर को कष्ट पहुँचाना पड़ता हैं या फिर भाग्य  से ही मिलती हैं ।
  • जीवन एक छोटा शब्द हैं पर इसकी गहराई मे अनेको रत्न और विष व्यात हैं।

हम सब ने नकारात्मक चरित्र के बारे में दिए जाने वाले आम बहानों को सुना है : "में तो ऐसा ही हूँ. में इसके बारे में क्या कर सकता हूँ ? में बस एक आलसी व्यक्ति हूँ. " हिन्दुइज्म सिखाता है क़ी जिस चरित्र के साथ इस जीवन में हमारा जन्म हुआ है वेह हमारे पुराने जन्मों के कुल कर्मों के जोड़ का परिणाम है. कुछ लोग जन्म से ही स्पष्ट रूप से धर्मनिष्ठ होते हैं, दुसरे मिश्रित प्रकृति के होते हैं और कुछ अन्य आत्म केन्द्रित एवं कुटिल. हालाँकि हिन्दुइज्म यह भी सिखाता है कि हम अपने चरित्र के गुणों को परिवर्तित कर सकते हैं , जिनके साथ हमारा जन्म हुआ था, आत्म सोच विचार एवं आत्म प्रयास के द्वारा, उनको देख कर और अपने विचारों पर नियंत्रण करके एवं वर्तमान में कर्म करके, विशेष रूप से सकारात्मक विचारों एवं कार्यों की पुनरावृति के द्वारा. जितना ज्यादा हम चरित्र के गुण को व्यक्त एवं उस पर सोच विचार करेंगे , जिस गुण को हम बढ़ाना चाहते हैं , उतना ही मजबूत वो बन जायेगा.
इस विचार को स्वीकारना कि हम आलस्य जैसे नकारात्मक चरित्र के गुण को बदल सकते हैं, एक आवश्यक पहला कदम होगा. एक बार इस परिपेक्ष को ध्यान में रखेंगे , तब निम्न लिखित चार पदों वाला दृष्टिकोण अपनाना , काफी उपयोगी होगा, इसके विपरीत सकारात्मक चरित्र के गुणों के विकास के लिए :
  1. सकारात्मक गुणवत्ता को समझना
  2. इसकी अभिव्यक्ति को पहचानना
  3. इसके लाभों को महसूस करना
  4. इसकी अभिव्यक्ति का अभ्यास करना
इस प्रक्रिया के उपयोग में, हम पतंजलि के योग सूत्र के निम्नलिखित सिद्धांतों को ध्यान में रख सकते हैं : "निम्नस्तरीय सोच को हटाने के लिए , उसके विपरीत सोच को पोषित किया जाना चाहिए, अस्वास्थ्यकर विचार, जैसे की किसी को नुकसान पहुँचाना या और कुछ - चाहे किया हो , किया जाना हो, या जिसकी मंजूरी दे दी हो , चाहे लालच से उपजा हो , गुस्से या मोह से, चाहे हल्के, मध्यम या अतिवाद से - कभी अज्ञानता और पीड़ा में पकने से रुकता नहीं. इसलिए हमें इसके विपरीत को पोषित करना चाहिए."
चलो देखते हैं कैसे इस चार कदम की प्रक्रिया को आलस्य को मेहनत में बदलने के लिए उपयोग किया जाये. पहले: सकारात्मक गुण को समझें. सुनिश्चित करें कि आपको जो चरित्र का गुण पोषित किया जाना चाहिए उसकी स्पष्ट जानकारी हो. इसको करने का एक अच्छा तरीका होगा कि इसको आप अपने शब्दों में परिभाषित करें. आइये हम बहुत लगन से कार्य करने को "मेहनती, जो किसी परियोजना को खत्म करने हेतु लम्बे समय तक कार्य कर सकता हो " के रूप में परिभाषित करें. इसका विपरीत आलस्य होगा, "कड़ी मेहनत ना करना , बिना काम के रहने को चुनना. " तदोपरांत सकारात्मक गुण पर ध्यान लगायें.
दूसरा : इसकी अभिव्यक्ति को पहचानें. सकारात्मक विचारों , शब्दों, दृष्टिकोण और व्यवहार का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों कि एक सूचि बनाएं. इसके बाद एक अन्य सूचि विपरीत गुणों कि बनाएं.
मेहनत               आलस्य
             अभी कार्य करें                  कार्य को टाल दें
            कार्य ख़त्म करने के लिए देर तक कार्य करें                 जल्दी से जल्दी रुक जायें
            अधिकतम उत्पादकता                  कम से कम करो


तीसरा : इसके लाभ को महसूस करें. इस गुण के फायदों कि लिस्ट बनाएं. इसमें शामिल कर सकते हैं अंतर्दृष्टि को जो इससे समस्याएं होती हों जब इसके विपरीत कार्य किया जाये.
  • मेहनत
  • परिवार एवं समुदाय कि सेवा करने की बेहतर क्षमता
  • कैरिएर में उन्नति के अवसर
  • सहयोगियों से प्रशंसा
  • बढ़ा हुआ आत्म सम्मान
  • आलोचना से बचाव



दोस्तों जीवन बहुत अनमोल है। .... आप अपने समय को अच्छे कार्यो में लगाये और अपने परिवार के साथ हमेशा खुशहाल रहें। ..... 



धन्यवाद 
अजय पाण्डेय 

ऊँ सर्वे भवन्तु सुखिनः


ऊँ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत ।।
ऊँ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ।।




                  हेलो दोस्तों। ..नमस्ते 

मैं अजय पाण्डेय आज से आप सभी को अपनी तरफ से पूरी एवं सत्य जानकारी देने का वादा करता हूँ। ...... बस आप लोग मेरे साथ जुड़े रहिये और अपना प्यार बनाये रखिये। ....... 





आपका अपना दोस्त अजय पाण्डेय 



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